Printed T-shirt of Dr. Ambedkar Call 8851188170, 8527533051

Printed T-shirt of Dr. Ambedkar Call 8851188170, 8527533051

Dr Ambedkar aur Bauddh Dhamm par pustak call 8851188170, 8527533051

Dr Ambedkar aur Bauddh Dhamm par pustak call 8851188170, 8527533051

Dr. Ambedkar ji ki sankshipt jivani aur unke sandeshon par pustak call M. 8527533051, 8851188170

Dr. Ambedkar ji ki sankshipt jivani aur unke sandeshon par pustak call M. 8527533051, 8851188170

Dr. Ambedkar ji Ki Prachar Samgri List-1

Dr. Ambedkar ji Ki Prachar Samgri List-1

Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri List-2

Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri List-2

List-3 Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri

List-3 Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri

List-4 Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri

List-4 Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri

List-5 Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri

List-5 Dr. Ambedkar, Bhagwan Buddha aur Guru Ravidas ji ji Ki Prachar Samgri
Jai Bhim Flags, Panchsheel flags

Hindi Books of Dr. Ambedkar

Hindi Books of Dr. Ambedkar

English Books of Dr. Ambedkar

English Books of Dr. Ambedkar

Polo T-shirt, Printed, Coloured, of Dr. Ambedkar and Coustamized

Polo T-shirt, Printed, Coloured, of Dr. Ambedkar and Coustamized

बुधवार, 17 अक्टूबर 2018

भाग सात : हमारी महिलाएं और उनकी महिलाएं

हालाँकि मैं पहले के कुछ अध्यायों में हमारी महिलाओं की दशा और दुर्दशा पर काफी कुछ बता चुका हूँ, परन्तु, यह जरुरी है कि मैं उनकी अवस्था और अस्तित्व के बारे में और प्रकाश डालूं। इस अध्याय की प्रेरणा है शंकरानंद शास्त्री जी की लिखित पुस्तक युगपुरुष बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर। उस पुस्तक में शास्त्री जी बताते हैं कि बाबासाहेब कहा करते थे कि हमारी औरतें न केवल पतिव्रता ही होती हैं, बल्कि वह गरीबी में भी बम्बई की उन महिलाओं की जैसी नहीं होती जो कि कीमा कबाब खाने और आरामपसंद जिंदगी के लिए अपने जिस्म का सौदा कर लेती हैं। हमारी (दलित) महिलाएं गरीबी में रूखा-सूखा खा कर भी अपना पेट भरती है। मैंने हमारे घरों में ऐसा बहुत बार देखा है कि हमारी महिलाएं प्याज या नमक से भी रोटी खा लेती हैं। कभी मीट बने तो केवल तरी से रोटी खा कर संतुष्ट हो जाती हैं। यह मेरी आँखों देखी सच्चाई है। पुरुष प्रधान समाज में हमारी महिलाएं हिन्दुओं (बामन, बनिया, वैश्य) की महिलाओं के परस्पर पहले से ही मर्द के कंधे-से-कंधा मिला कर अपने और अपने परिवार का पेट पाल रही हैं। जब आपको सड़क पर झाड़ू लगाती, राशन की दूकान पर कंकड़ बिनती, कारखानों और फैक्ट्रियों में मजदूरी करती, सर पर मांस रख कर गली-गली घूमती, कहीं सब्जी या फल बेचती महिलाएं दिखे तो समझ जाना कि यह कोई बामन, बनिया या वैश्य की नहीं बल्कि दलित वर्ग की महिला है। इन महान महिलाओं के दम पर ही बहुत से दलित परिवार पल रहे हैं। वैसे भी दलितों में शराब पीने की जो आदत है, उससे बहुत से लोग बुढ़ापे में कदम रखने से पहले ही मर जाते हैं। ऐसे में हमारी महिलाएं ही अपने बच्चों को संभालती हैं। ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जिन्होंने छोटी-मोटी मजदूरी कर के अपने बच्चों को इतना पढ़ाया कि वे आई. ए. एस. अफसर बन गए। कुछ वर्ष पहले सफाई करनेवाली एक महिला की खबर छपी कि उसने अपने तीन लड़कों को पढ़ाया और वे तीनों ही प्रशासनिक सेवा में बड़े अफसरों के पद पर नियुक्त हुए। मैंने ऐसे बहुत से उद्दाहरण अपनी आंखों से देखे हैं। कोई महिला चप्पल की फैक्ट्री में रब्बड़ की कटाई करने जाती, तो कोई घरों में काम करने, कोई सौदा बेचती तो कोई सड़क पर भुट्टे बेचती। ऐसी भी महिलाएं देखी जो कि इतनी सक्षम रहीं कि अपने पति के साथ मिल कर छोटे-मोटे व्यापार को भी बहुत बड़ा कर दिया। कहते हैं कि हर पुरुष की तरक्की के पीछे एक महिला होती है। पर जहाँ तक दलित वर्ग की बात है तो लगभग पचास प्रतिशत वर्ग की तरक्की के पीछे दलित महिलाएं हैं। इतना संघर्ष शायद ही किसी अन्य वर्ग की महिलाएं करती हैं।

परन्तु अफ़सोस कि हमारी महिलाएं पढ़ाई में आज भी बहुत पीछे हैं। अभी भी महानगरों के बहुत से घरों में लड़की के कॉलेज जाने की बात से उसके परिवार को चिढ़ होने लगती है। आरक्षण होते हुए भी हमारी अधिकांश्तर लडकियां पत्राचार से ही उच्च शिक्षा लेती है। भले ही कॉलेजों में आरक्षण की सीटें खाली क्यों न चली जाएं पर हमरी लडकियां रेगुलर कॉलेज जाने में अभी भी बहुत पीछे है। इससे उनका वह विकास और वह व्यक्तित्व नहीं बन पाता जो हिन्दू लड़कियों का होता है। एक शिकायत यह आती है कि हमारी लडकियां जब पढ़-लिख जाती है तो उन्हें दलित वर्गों या उनकी जाति में उपयुक्त लड़के शादी के लिए नहीं मिलते। ऐसे में यह सोच भी लोगों के दिमाग में है कि यदि पत्नी अधिक सक्षम होगी तो पति का अहम भाव उनके रिश्ते को खराब कर सकता है। परन्तु मेरे विचार यह है कि दलित युवतियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति से पहले समाज है। जिस प्रकार पुरुष अपने परिवार और समाज की जिम्मेदारी उठता है, वही महिलाओं को भी करना होगा। आज पढ़ी-लिखी नौकरीपेशा लड़की से तो बहुत से हिन्दू लड़के शादी के लिए तैयार हो जाते हैं, पर यह लड़के उन्ही के वंशज हैं जिन्होंने हमारे पुरुष और समाज का दमन किया और हमारी महिलाओं का शोषण किया। आज भी दलित वर्ग की महिलाओं के लिए हिन्दू अभद्र कहावतें बोलते हैं। उनकी देखादेखी और धर्मों के लोग भी हमारी महिलाओं को हीन भावना से देखते हैं। बहुत से राज्यों में दलित लडकियां हिन्दुओं की रखैल बन कर अपने परिवार को पालती थी, पर उन्हें पत्नी का दर्जा और सम्मान नहीं मिला। क्या अपने शोषण का यह इतिहास जान कर भी कोई दलित लड़की किसी हिन्दू (बामन, बनिया और वैश्य) से शादी करना चाहेगी ? मेरा विचार यह है कि यदि कोई लड़की पढ़-लिख गयी है तो दलित वर्ग में ही उसकी शादी करनी चाहिए, फिर चाहे अपनी जाति से अलग ही क्यों न हो। लड़कियों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि पुरुष के सम्मान का ध्यान रखे और लड़कों को भी यदि एक पढ़-लिखी नौकरीपेशा लड़की मिल जाए तो न ही तो इससे किसी प्रकार की दुर्बलता या असक्षमता को महसूस ही करना चाहिए और न ही अपने अहम को खुद ठेस पहुंचानी चाहिए। ऐसे में लड़के को चाहिए कि वह अच्छे से अपने काम को देखे और अधिक-से-अधिक धन अर्जित करे। पर यदि लाख कोशिशों के बाद भी उपयुक्त वर न मिले तो हिन्दुओं में शादी कर लेनी चाहिए। यही विचार मेरा दलित वर्ग के लड़कों के बारे में भी है।

हमारे समज के पुरुषों को यह बात समझनी चाहिए कि आज यदि वे दुर्बल हैं, यदि वे धनवान नहीं हैं, यदि हिन्दू दलित लड़कियों से शादी कर रहे हैं, तो वह इसलिए है कि दलित वर्गों के पुरुष कमज़ोर हैं।  इसलिए हमारे पुरुषों को सबसे पहले अपनी महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्हें व्यभिचार नहीं करना चाहिए। अपनी शिक्षा और धन को बढ़ाना चाहिए। अपनी महिलाओं के विकास की सोचना चाहिए। आखिर यही वह महिलाएं हैं जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी हमें पाला है। और जब तक महिलाओं का समाज में उतना ही सम्मान नहीं होता जितना कि किसी पुरुष का होता है, तब तक वह समाज सही प्रकार से न ही तो उन्नति ही कर पाएगा और न ही अपनी रूढ़िवादी सोच को छोड़ पाएगा। इसलिए हमारे पुरुष को महिलाओं का सम्मान और आदर करना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें

For Donations

यदि डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों को प्रसारित करने का हमारा यह कार्य आपको प्रशंसनीय लगता है तो आप हमें कुछ दान दे कर ऐसे कार्यों को आगे बढ़ाने में हमारी सहायता कर सकते हैं। दान आप नीचे दिए बैंक खाते में जमा करा कर हमें भेज सकते हैं। भेजने से पहले फोन करके सूचित कर दें।

Deposit all your donations to

State Bank of India (SBI) ACCOUNT: 10344174766,

TYPE: SAVING,
HOLDER: NIKHIL SABLANIA

Branch code: 1275,

IFSC Code: SBIN0001275,

Branch: PADAM SINGH ROAD,

Delhi-110005.

For inquiries call: 8527533051 sablanian@gmail.com